शुक्रवार को दोबारा शुरू हुए प्रदर्शनों में हिंसा फैलाकर आम लोगों को उकसाने की साज़िश रच रहे हैं, ताकि बग़दाद सरकार को गिरा सकें।
अमरीका और उसके सहयोगियों ने इसके लिए बड़े पैमाने पर हिंसा फैलाने और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने की योजना बनाई है, जिसे उसके एजेंट आगे बढ़ा रहे हैं।
शुक्रवार से शुरू हुए प्रदर्शनों के दूसरे चरण में अब तक 42 लोगों की जान जा चुकी है और हज़ारों घायल हो गए हैं।
इस बीच, सोशल मीडिया पर एक ऐसी वीडियो वायरल हुई है, जिसमें विदेशी एजेंटों को इराक़ी प्रदर्शनकारियों पर फ़ायरिंग करते हुए देखा जा सकता है।
सूत्रों का कहना है कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद, इराक़ी पुलिस ने फ़ायरिंग करने वाले तत्वों की पहचान करके उन्हें गिरफ़्तार कर लिया है।
जहां तक शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का संबंध है, इराक़ी प्रधान मंत्री और वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह सीस्तानी ने भी इसे नागरिकों का अधिकार बताते हुए उसका समर्थन किया है।
लेकिन विदेशी एजेंट प्रदर्शनकारियों पर फ़ायरिंग करके उन्हें भड़का रहे हैं, ताकि प्रदर्शन क़ाबू से बाहर हो जायें और देश में अराजकता फैल जाए।
वहीं इराक़ के इस्लामी प्रतिरोधी संगठन हिज़्बुल्लाह ने एक बयान जारी करके देश की जनता को अमरीका और इस्राईल की साज़िशों के प्रति होशियार रहने के लिए कहा है।
हिज़्बुल्लाह संगठन का कहना है कि अमरीका, इस्राईल और सऊदी अरब इन प्रदर्शनों को हिंसक बनाकर इनसे काफ़ी आशाएं लगाए बैठे हैं।
इराक़ के इस संगठन का कहना है कि जो लोग इराक़ में दाइश की पराजय से निराश हैं, अब उन्होंने प्रदर्शनों में अपने एजेंट घुसा दिए हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाएं और लोगों को सरकार के ख़िलाफ़ हिंसा के लिए भड़का सकें।
जानकारों का मानना है कि तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश की पराजय के बाद अब इस देश के ख़िलाफ़ यह एक बड़ी साज़िश है, ताकि बग़दाद में प्रधान मंत्री आदिल अब्दुल मेहदी की सरकार को गिराकर एक पिट्ठू सरकार का गठन किया जा सके, या लीबिया की तरह इस देश को में भी अराजकता फैलाकर इसके संसाधनों को लूटा जा सके।